अर्थव्यवस्था

कृषि/ खेती  :

नवादा जिला में कृषि आजीविका का मुख्य आधार है और 78% लोग कृषि पर निर्भर हैं। लोगों के प्रमुख व्यवसायों में वर्षाआधारीत कृषि, पशुपालन और आकस्मिक श्रमिक कार्य होते हैं। खरीफ अवधि के दौरान श्रमिक वर्ग का बहुत बड़ा समूह करीब 4 महीने तक व्यस्त रहते हैं। नवादा जिला में एक कृषि विज्ञानं केंद्र भी स्थापित है | इसकी स्थापना  आईसीएआर, नई दिल्ली द्वारा किसानों के लिए प्रद्योगिकी का उपयोग करते हुए कृषि क्षेत्र में तेजी से हस्तांतरण के लिए की गयी है| इस कृषि विज्ञान केंद्र का सञ्चालन क्षेत्र नवादा जिला है|

उद्योग :

नवादा में कोई कार्यात्मक बड़े उद्योग नहीं हैं| यहाँ पे केवल छोटे छोटे 18 सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम (SME) स्थित हैं| किन्तु यहाँ पर औद्योगिक विकास कि संभावना को नकारा नहीं जा सकता है| नवादा से 6 KM दुरी पर कादिरगंज नामक स्थान है, जहाँ की बहुत पुराना एवं प्रसिद्द रेशम लघु उद्योग है| यहाँ कई कारीगर रेशम कि सफाई एवं बुनाई का कार्य करते हैं | कादिरगंज का भागलपुर शहर के साथ वाणिज्यिक और व्यापारिक सम्बन्ध हैं , जो भारत से रेशम के निर्यात सहित रेशम के व्यवसाय के लिए प्रसिद्ध शहर है|न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने बिहार के नवादा जिले में राजौली की पहचान राज्य के अतिरिक्त 2,000 एमडब्ल्यू परमाणु क्षमता बनाने के संभावित स्थल के रूप में की है। इस जिले में कृषि-उद्योगों के लिए महान संभावनाएं हैं। इसमें चावल मिल, चीनी उद्योग, तिलहन उद्योग, मकई का झाग उद्योग और कृषि मशीनरी उद्योग शामिल हैं।

पर्यटन :

पर्यटन के क्षेत्र में नवादा जिले का अपना गौरव है और इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की क्षमता है। शहर के आसपास कई रमणीय स्थल स्थित हैं , जिसमे पर्यटक काफी रूचि लेते हैं| इनमें ककोलत झरना (शहर से 24 KM), शेखोदेवरा आश्रम (यहाँ स्थित सर्वोदय आश्रम जो की कौआकोल प्रखंड में है, का निर्माण श्री जय प्रकाश नारायण द्वारा करवाया गया था तथा इसका उद्घाटन भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी के द्वारा किया गया था| ), हडिया सूर्य मंदिर  एवं कई रुचिकर स्थल हैं , जहाँ पर्यटक मनोरंजन का लाभ उठा सकते हैं|